चलो गाँव चलें। August 06, 2017 शहर के शोर में कहीं ग़ुम हो गयी है दोस्ती, चलो फिर गाँव चलें, पीपल के छावँ चलें, तुम बनाओ एक कागज़ की नाव, मैं बस्ते में सपनों को भरता हूँ, उतार कर बरखा में नाव, चलो धरती के उस पार चलें, चलो फिर गाँव चलें। Read more